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	<channel>
		<title>پرتال علمی دانشگاهی ثمین</title>
		<link>https://rif.kowsarblog.ir/</link>
		<description></description>
		<language>fa-IR</language>
		<docs>http://blogs.law.harvard.edu/tech/rss</docs>
				<item>
			<title>&#34; دانلود تحقیق-پروژه و پایان نامه | قسمت 16 – 8 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557094962&quot; data-words=&quot;258&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;negative mood- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Grabe etal.- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Socio-cultural- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Social comparison theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Scots, Paxton &amp;amp; Wrothim – ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Internal locus of control- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;External locus of control- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Self discrepancy theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Ideal self- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Real self- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Navas, Paxton &amp;amp; Alesker- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Self schema theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Mayers &amp;amp; Biuka- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;introjected- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;appearance self-schema- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Objectification theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Grippo &amp;amp; Hill- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Feministic theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Mac Kinly- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Monreou &amp;amp; Hoon- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Body shame- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Social construction- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Tigmann &amp;amp; Slater- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. Williamson ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Johnson &amp;amp; Schlundt ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Riva &amp;amp; Wells ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-obsessive ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Aeta, Lodan &amp;amp; Laly- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Chout- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Mac Kobey, Richardelly, Melore &amp;amp; Ball- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Wilkash &amp;amp; Wide – ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Wisman, Mosiman &amp;amp; Aharner- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Kater, Rohwer &amp;amp; Londry- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Staice, Marty, Spour, Persnell &amp;amp; Show- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Heinkeh &amp;amp; Paxton- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Persnell, beyerman &amp;amp; Madley- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Life quality questionnaire- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Litelton &amp;amp; Olendaik- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Kerago, Stice &amp;amp; Gery- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Kelly, Wignol &amp;amp; Ditmmar- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Cultivation theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Absorption-addition theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Social learning theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Solidarity theory- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-DSM – IV – TR ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;Somatoform disorder- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Khemlanj, Patel &amp;amp; Neziroghlu ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Steiner – Adair ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Newmark, etal. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– O’Dea &amp;amp; Abraham ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Staice, etal. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Piran ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;experiential- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;cognitive modification- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;justification- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;relaxation- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;relabeling- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;response prevention- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;exposer- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;alternative interpretation- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cash, Lavelle &amp;amp; Rosen ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Farrell, Shafran, Lee &amp;amp; Fairburn ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Butters &amp;amp; Cash ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Cash &amp;amp; Grant ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Risen ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Vibrio-acoustic ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Ruttel ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-16-nn8-1&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-16-nn8-1</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; دانلود فایل های دانشگاهی – فصل پنجم – 1 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557129156&quot; data-words=&quot;546&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۵ ﻫﻤﮕﻨﻰ ﺿﺮﺍﻳﺐ ﺭﮔﺮﺳﻴﻮﻥ&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ﻳﻜﻲ ﺍﺯ ﻣﻔﺮﻭﺿﻪ ﻫﺎﻱ ﺍﺳﺎﺳﻲ ﺩﺭ ﺗﺤﻠﻴﻞ ﻛﻮﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﻫﻤﮕﻨﻲ ﺿﺮﺍﻳﺐ ﺭﮔﺮﺳﻴﻮﻥ ﺩﺭ ﮔﺮﻭﻩ ﻫﺎﻱ ﻣﺨﺘﻠﻒ ﺍﺳﺖ. ﺑﻪ ﺍﻳﻦ ﻣﻌﻨﺎ ﻛﻪ ﺭﺍﺑﻄﻪ ﻣﺘﻐﻴﺮﻫﺎﻱ ﻛﻤﻜﻲ ﻭ ﻭﺍﺑﺴﺘﻪ ﺑﺎﻳﺪ ﺩﺭ ﮔﺮﻭﻩ ﻫﺎﻱ ﻣﺨﺘﻠﻒ ﻫﻤﮕﻮﻥ ﺑﺎﺷﻨﺪ ﻭ ﻣﺘﻐﻴﺮ ﻣﺴﺘﻘﻞ ﻭ ﻛﻤﻜﻰ ﺑﺎ ﻫﻢ ﺗﻌﺎﻣﻞ ﻧﺪﺍﺷﺘﻪ ﺑﺎﺷﻨﺪ. ﺑﺮﺍﻯ ﺑﺮﺭﺳﻰ ﺍﻳﻦ ﻣﻔﺮﻭﺿﻪ ﺍﺯ ﺍﺛﺮ ﻣﺘﻘﺎﺑﻞ ﻣﺘﻐﻴﺮ ﻣﺴﺘﻘﻞ( ﮔﺮﻭﻩ )ﻭ ﻣﺘﻐﻴﺮ ﻛﻤﻜﻰ(ﭘﻴﺶ ﺁﺯﻣﻮﻥ )ﺍﺳﺘﻔﺎﺩﻩ ﺷﺪ. ﺍﮔﺮ ﺍﻳﻦ ﺗﻌﺎﻣﻞ ﺍﺯ ﻧﻈﺮ ﺁﻣﺎﺭﻯ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭ ﺑﺎﺷﺪ ﺩﺍﺩﻩ ﻫﺎ ﺍﺯ ﻓﺮﺿﻴﻪ ﻫﻤﮕﻨﻰ ﺷﻴﺐ ﻫﺎﻯ ﺭﮔﺮﺳﻴﻮﻥ ﭘﺸﺘﻴﺒﺎﻧﻰ ﻧﻤﻰ ﻛﻨﺪ.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ﻣﺮﺑﻮﻁ ﺑﻪ ﺍﺛﺮ ﻣﺘﻘﺎﺑﻞ ﻣﺘﻐﻴﺮ ﻣﺴﺘﻘﻞ ﻭ ﭘﻴﺶ ﺁﺯﻣﻮﻥ ﻫﺎ ﺑﺮﺭﺳﻲ ﺷﺪ ﻛﻪ F ﺟﻬﺖ ﺑﺮﺭﺳﻲ ﺍﻳﻦ ﻣﻔﺮﻭﺿﻪ ﻣﺤﺎﺳﺒﻪ ﺷﺪﻛﻪ ﺑﻪ ﻟﺤﺎﻅ ﺁﻣﺎﺭﻱ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭ ﻧﻤﻲ ﺑﺎﺷﺪ. ﺑﻪ ﺍﻳﻦ ﻣﻌﻨﺎ ٪۸۷۶ ﺑﺎ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭﻱ ۰/۲۳۰ ﻣﻘﺪﺍﺭ ﺁﻥ ﻛﻪ ﺿﺮﺍﻳﺐ ﺭﮔﺮﺳﻴﻮﻥ ﺩﺭ ﮔﺮﻭﻩ ﻫﺎﻱ ﻣﺨﺘﻠﻒ ﺗﻔﺎﻭﺕ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭﻱ ﻧﺪﺍﺭﻧﺪ ﻭ ﺩﺭ ﻭﺍﻗﻊ ﻫﻤﮕﻮﻥ ﻫﺴﺘﻨﺪ. ﭼﻮﻥ ﺩﺭ ﺍﻳﻨﺠﺎ ﺗﻌﺎﻣﻞ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭ ﻧﻴﺴﺖ ﺑﻨﺎﺑﺮﺍﻳﻦ ﻣﻔﺮﻭﺿﻪ ﻓﻮﻕ ﺗﺄﻳﻴﺪ ﻣﻰ ﺷﻮﺩ. ﺑﻨﺎﺑﺮﺍﻳﻦ ﺣﺎﻝ ﻛﻪ ﻭﺟﻮﺩ ﻫﻤﮕﻨﻰ ﺷﻴﺐ ﻫﺎﻯ ﺭﮔﺮﺳﻴﻮﻥ ﺑﺮﺭﺳﻰ ﺷﺪ ﻣﻰ ﺗﻮﺍﻥ ﺁﺯﻣﻮﻥ ﺗﺤﻠﻴﻞ ﻛﻮﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﺭﺍ ﺍﺟﺮﺍ ﻛﺮﺩ. ﻫﻤﮕﻨﻰ ﻭﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﻫﺎ :ﺑﺮﺍﻯ ﺑﺮﺭﺳﻰ ﻣﻔﺮﻭﺿﺔ ﺑﺮﺍﺑﺮﻯ ﻭﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﻫﺎ ﺍﺯ ﺁﺯﻣﻮﻥ ﻟﻮﻳﻦ ﺍﺳﺘﻔﺎﺩﻩ ﺷﺪ. ﻧﺸﺎﻥ ﻣﻰ ﺩﻫﺪ ﺳﻄﺢ ﻣﻌﻨﺎﺩﺍﺭﻱ ﺑﺮﺍﻯ ﻣﺘﻐﻴﺮ ﻭﺍﺑﺴﺘﻪ ﭘﻴﺸﺮﻓﺖ ﺗﺤﺼﻴﻠﻰ ﺑﺮﺍﺑﺮ (۱) ﻫﻤﺎﻥ ﻃﻮﺭ ﻛﻪ ﺟﺪﻭﻝ ﺑﻮﺩ ﻛﻪ ﺑﺎﻻﺗﺮ ﺍﺯ ﺳﻄﺢ ﻗﺎﺑﻞ ﻗﺒﻮﻝ ﺑﺮﺍﻯ ۰/۱۷۰ ﻭ ﺑﺮﺍﻯ ﻣﺘﻐﻴﻴﺮ ﻭﺍﺑﺴﺘﻪ ﺍﺿﻄﺮﺍﺏ ﺍﻣﺘﺤﺎﻥ ﺑﺮﺍﺑﺮ ۰/۸۲۱ ﺭﺩ ﻓﺮﺽ ﺻﻔﺮ ﺍﺳﺖ. ﻭﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﮔﺮﻭﻩ ﻫﺎ ﺗﻔﺎﻭﺕ ﻗﺎﺑﻞ ﻣﻼﺣﻈﻪ ﺍﻱ ﺑﺎﻫﻢ ﻧﺪﺍﺭﻧﺪ ﻭ ﻣﻔﺮﻭﺿﻪ ﻫﻤﮕﻨﻲ ﻭﺍﺭﻳﺎﻧﺲ ﺑﺮﻗﺮﺍﺭ ﺍﺳﺖ. ﺍﻳﻦ ﺍﻣﺮ ﺍﺯ ﺁﻥ ﺟﻬﺖ ﻣﻬﻢ ﺍﺳﺖ ﻛﻪ ﭘﺎﻳﺎﻳﻰ ﻧﺘﺎﻳﺞ ﺑﻌﺪﻯ ﺭﺍ ﺗﺄﻳﻴﺪ ﻣﻰ ﻛﻨﺪ.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول ۴-۳ آزمون لوین&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;منبع تغییرات&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics-16.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;درجه آزادی۱ درجه آزادی۲ آماره F سطح معناداری پس آزمون پیشرفت تحصیلی ۱ ۱۰۴ ۰٫۰۵۲ ۰٫۸۲۱ پس آزمون اضطراب تحصیلی ۱ ۱۰۴ ۱٫۹۱&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول۴-۴ نمره ی دانش آموزان در پیش آزمون و پس آزمون پیشرفت تحصیلی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;انحراف معیار میانگین تعداد گروه متغیر ۱٫۷۷ ۱۵٫۹۰ ۵۲ کنترل نمره پس ازمون ۱٫۷ ۱۷ ۵۴ ازمایش ۲٫۱۵ ۵٫۶۳ ۵۲ کنترل نمره پیش ازمون ۲٫۱۶ ۵٫۵۳ ۵۴ ازمایش&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول ۴-۵ توصیف نمرات دانش آموزان در پس آزمون و پیش آزمون اضطراب امتحان&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;انحراف معیار میانگین تعداد گروه متغیر ۱۶/۲ ۵۳/۵ ۵۴ ازمایش نمره پیش ازمون ۱۵/۲ ۶۳/۵ ۵۲ کنترل ۷۰/۱ ۱۷ ۵۴ ازمایش نمره پس ازمون ۷۷/۱ ۹۰/۱۵ ۵۲ کنترل&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول ۴-۶٫ نتایج تحلیل کواریانس&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سطح معنی داری fمقدار درجه ازادی منبع تغییرات ۰۱۳/۰ ۵۴/۴ ۲ پیش ازمون تحصیلی ۰۰۸/۰ ۱۰/۵ ۲ پیش ازمون اضطراب امتحان ۰۰۱/۰ ۰۴/۴۲ ۲ روش تدریس&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جداول شماره ۴-۳ و ۴-۴ نشان می‌دهد گروه آزمایش در مقایسه با گروه کنترل نمره پیشرفت تحصیلی دانش آموزان افزایش و نمره اضطراب امتحان کاهش یافته است. این نتیجه حاکی از آن است که پیشرفت ایجاد شده معنادار بوده و حاصل عمل یادگیری مشارکتی می‌باشد پیش فرض تجانس واریانس گروه ها که با بهره گرفتن از آزمون لوین انجام گرفت بیان می‌دارد که واریانس گروه ها متجانس می‌باشد به عبارتی فرض صفر آزمون لوین مبنی بر متجانس بودن واریانس گروه ها قابل رد شدن نمی باشد. لذا فرض صفر مورد پذیرش قرار می‌گیرد و واریانس گروه ها متجانس می‌باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ار طرفی آزمون نرمال بودن متغیرها نیز که با آزمون KS انجام گرفت نشان می‌دهد که پیش فرض نرمال بودن متغیرها نیز برای آزمون کواریانس محیا می‌باشد. در نهایت نتیجه ی آزمون تحلیل کواریانس نشان می‌دهد که بین گروه ها تفاوت معنادار وجود دارد. مقدار F تاثیر متغیر مستقل معنادار می‌باشد، یعنی پس از خارج کردن تاثیر پیش آزمون، اختلاف معناداری بین میانگین نمرات دو گروه وجود دارد. ‌بنابرین‏ فرضیه صفر معنادار نبودن اختلاف میانگین دو گروه در پس آزمون پس از حذف اثر احتمالی پیش آزمون رد می شود. لذا در تحقیق حاضر پس از خارج کردن اثر متغیرهای مزاحم یا مداخله گر مشاهده می شود که شیوه ی تدریس مشارکتی بر پیشرفت تحصیلی و اضطراب امتحان دانش آموزان تاثیر دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S-52.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;فصل پنجم&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;بحث و نتیجه گیری&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۵-۱ بحث و نتیجه گیری&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-فایل-های-دانشگاهی-n-فصل-پنجم-nn1&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-فایل-های-دانشگاهی-n-فصل-پنجم-nn1</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; مقالات تحقیقاتی و پایان نامه | شکل( ۲-۱ ) ویژگی های چهار خلط مزاجی ، صفراوی ، دموی ، بلغمی و سوداو ی – 2 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557124642&quot; data-words=&quot;1197&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شاید ارزش ‌و اهمیت هر مدیری در این باشد که بتواند تفاوت بین شخصیّتهاراتشخیص بدهد تردیدی نیست که اگر فرد از نظر شخصیّت با نوع کاری که باید انجام بدهد سازش داشته باشد ،عملکرد بهتری خواهد داشت ونسبت به کار خودرضایت شغلی بیشتری حاصل می‌کند ،گذشته از این هماهنگی بین شخصیّت وشغل مزایا ی دیگری نیز در بر دارد .برای مثال اگر مدیر فرد را از نظر شخصیّتی بشناسد ‌و بداند که کانون کنترل وی در خارج قرار دارد ،خوب می‌داند که این شخص تمایلی به پذیرفتن مسئولیّت ندارد و در مقایسه با کسانی که کانون کنترل درونی دارند ،نسبت به کار خود رضایت کمتری خواهد داشت .(رابینز، استیفن-۱۳۸۷)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_15_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://nefo.ir/&quot;&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-5.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شخصیّت را شاید بتوان اساسی ترین موضوع علم روان شنا سی دانست . زیرا محور اساسی بحث در زمینه هایی مانند یاد گیری ، انگیزه ادارک ،تفکر ، عواطف واحساسات ،هوش ومواردی از این قبیل است. روانشناسان شخصیّت وجود شباهت رابین افرادقبول دارند اما توجه آن ها بیشتر به تفاوت‌های افراد ‌از یکدیگر معطوف است .اگر چه هر انسان ورویدادی در نوع خود منحصر به فرد است . با وجود این، بین بسیاری از انسان‌ها ‌و رویدادهای زندگی آن ها آنقدرشباهت وجود دارد که بتوان نکات مشترکی را در نظر گرفت ‌و درست همین الگوهای رفتاری است که روانشناسان شخصیّت درپی درک آنند،روانشناسان شخصیّت برای کلیت فرد وتفاوت های فردی اهمیّت خاصی قائلند . اگرچه آن ها معمولا معتقدند که هر فردی از بعضی جهات منحصر به فرد می‌باشد،اما بحث برسر معانی منحصر به فرد برای مطالعه ی شخصیّت زیاداست .یک دیدگاه این که ،هر فرد ی آن طور متمایز می شود که دوره های خاص زندگی وتجاربش ، درک می شود&lt;strong&gt;.پس بنا بر این روش مقایسه با دیگران معنا ندارد .این دیدگاه فرد نگرا است که با مطالعه ی گسترده زندگی افراد با هدف دست یابی به یک فهم منحصر به&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;فردی ،به وجود می‌آید .اما دیدگاه دیگر ،روش قانون گری است که معتقداست منحصر به فردی یک فرد نتیجه ی وضعیت جسمی و زیستی وقوا نین روان شناختی است .بنا ‌به این روش هر فرد ،ترکیب منحصر به فردی از اجزاء است ،اگر چه جزئی به وسیله فرایند عمومی ایجاد می شود واین فرایند می‌تواند از طریق تحقیق ابعاد خاص شخصیّت افراد،برای تدوین قوانین رفتارهای کلی ،درک شود .(قربانی ،الیاس-۱۳۸۲ )&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;روانشناسان مدرن در سال ۱۸۷۹با تلاش وسلهلم ونت&lt;sup&gt;[۳۲]&lt;/sup&gt; برای تا سیس آزمایشگاه روان شناسی آغاز کردندکمی بعد در سال ۱۸۸۴ گالتون اندازه گیری شخصیّت ظاهری را پیشنهاد نمود .گا لتون براین باور بودکه ‌خصوصیاتی که ما را هدایت می‌کنند یک چیز قطعی وبا دوام هستند وبنا بر این تلاش برای اندازه گیری آن ها منطقی است. &lt;/strong&gt;تحقیق در شخصیّت به معنی مطالعه ی چگونگی تفاوت افراد در ادراک ونحوه ی ارتباط این تفاوت ها با کنش کلی انسان است می توان گفت که نظریه های شخصیّت از زمانی که بقراط حکیم یونانی ،افراد انسانی را از نظر غلبه اخلاط چهار گانه به سنخ های صفراوی ،بلغمی ،دموی ،وسودای تقسیم نمود وبرای هر یک از سنخ ها ، ویژگی های معین قائل شد ،آغاز شده است .از آن زمان تا کنون نظریه های گوناگونی با گرابش و زمینه‌های متفاوت درباره ی شخصیّت ،انسان عرضه شده است .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‌در مورد تقسیم بندی شخصیّت ،نظریه های زیر وجود دارد :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;الف –نظریه های روان کاوی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ب – نظریه های پدیدار شناختی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ج-نظریه صفات&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;د-نظریه های انسان گرایی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ه-نظریه های شناختی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ر –نظریه های یادگیری اجتماعی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ز-نظریه های انگیزشی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;نظریه ی جالینوس&lt;/strong&gt; :جالینوس&lt;sup&gt;[۳۳]&lt;/sup&gt; پزشک وحکیم یونانی (۲۰۱-۱۳۱بعداز میلاد ) بر پایه سیستم طبقه بندی بقراط&lt;sup&gt;[۳۴]&lt;/sup&gt; (۴۶۰-۳۷۷ قبل از میلاد )پدر علم پزشکی که مزاج آدمی را در چهار طبع صفرا، سودا ،بلغم و خون خلاصه ‌کرده‌است حالت های روانی خاصی از جمله صفراوی مزاج –سودایی مزاج –دموی مزاج را تشخیص می‌دهد ومعتقد است که هر کدام از ین تیپها به ترتیب خصوصیاتی چون تند خو وزود خشم ،بی حال وبی عاطفه ،افسرده وخوش بین وشاد را دارا هستند (رأس ،آلن- ۱۳۷۳)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Depressed-psychology-new-342.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;نظریه یونگ&lt;sup&gt;[۳۵]&lt;/sup&gt;&lt;/strong&gt;: رویکرد طبقه بندی جالینوس که از آن یاد شد مبتنی بر مشاهده ی تفاوت های فردی در ساختار بدنی وتلاش برای ارتباط دادن این تفاوت ها با شخصیّت است .رویکرد دیگر مشاهده ی خصایص شخصیّتی (صفات ) افراد مختلف و تلاش در جهت طبقه بندی آ ن بر طبق سنختیشان (تیپ شان)،بدون توجه خصوصیّات بدنی آن هاست .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یونگ(۱۹۲۳)یا به کار گیری این رویکرد دو نوع نگرش با جهت گیری درون گرایی و برون گرایی&lt;sup&gt;[۳۶]&lt;/sup&gt; را مطرح می کندفرد درون گرا کم حرف ‌و گوشه گیر است وبیش تر علا قه دارد که در خود ش فرو رود تا این که با دیگران ارتباط داشته باشد در حالی که فرد برون گرا عمدتاً شخصی اجتماعی وخوش برخورد که علاقه به تماس با جهان خارج دارد .از دیدگاه یونگ درون گرایی وبرون گرایی ‌خصوصیاتی ذاتی ‌و فطری هستند که در طی دوران زندگی قابل تغییر واصطلاح می‌باشد. (رأس،آلن- ۱۳۷۳)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;نظریه ی آیزنک&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آیزنک(۱۹۵۳)گونه های شخصیّتی را به صورت ‌گروه‌های مستقل و مجزا از هم که بتوان مردم را بر اساس آن طبقه بندی کرد تفسیر نمی کند بلکه معتقد است که گونه های شخصیّتی به شکل ابعاد به هم پیوسته ای هستند که در راستای آن مردم با هم متفاوتند همان طور که یک صفت کم و بیش می‌تواند معرف خصوصیّات یک فرد باشد همچنین می‌تواند به عنوان یک گونه مهم مشخص شود (مرادی،داود-۱۳۸۱).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;درون گرایی و برون گرایی قطب های نهایی یک بعد واحد هستند . ‌بنابرین‏ تیپ یک شخص ممکن است در یکی از قطب ها و یا در نقطه ای بین آن ها واقع شود ، از این رو نمی توان قبول کرد که مردم یا کاملا برون گرا و یا کاملا درون گرا هستند ((رأس ،نقل از مرادی،داود-۱۳۸۱)) .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در نظام آیزنک فقط دو بعد وجود دارد بعد درون گرایی و برون گرایی و بعد استواری و نا استواری هیجانی که گونه ها ، قطب ها و کرانه های این ابعاد هستند . با ترکیب این دو بعد ،همان گونه که در شکل نشان داده شده است ، چهار ربع متصور است که هر ربع در بر گیرنده صفاتی است . آیزنک با محاسبات آماری نشان داده است که این چهار ربع با چهار خلط مزاجی ، صفراوی ، دموی ، بلغمی و سوداو ی مطابقت دارد ( همان منبع)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;شکل( ۲-۱ ) ویژگی های چهار خلط مزاجی ، صفراوی ، دموی ، بلغمی و سوداو ی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در شکل ۲-۱ بعد شخصیّتی مفهوم سازی شده توسط آیزنک و ارتباط آن با مزاج ارائه شده توسط بقرا ط نشان داده شده است ( مرادی ،داود-۱۳۸۱) .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در یکی از تقسیمات انجام شده ‌در مورد شخصیّت دو گونه ی الف و ب مطرح شده است ، فردی که دارای الگوی رفتاری گونه ی الف می‌باشد . به طور کلی از نظر شخصیّتی فردی است که به صورت تهاجمی درگیر مبارزه ای مداوم و پی درپی جهت نائل شدن به حداکثر پیشرفت در حداقل زمان است که برای دست یابی به چنین خواستی ، ضرورت دارد که در مقابل اشیا و افراد همیشه جبهه گیری کند (فریدمن و روزن من &lt;sup&gt;[۳۷]&lt;/sup&gt;۱۹۷۴ رأس ۱۳۷۳ ) موعد های کاری خیلی حساسیت نشان نمی دهند ، بدون احساس گناه استراحت می‌کنند و از اوقات فراغت لذت می‌برند و اهل لاف و گذاف نیستند . (فرید من و روزن من ۱۹۷۴ گلاس ۱۹۷۴ ، اورنگ و پی پال ۱۹۸۴ ، رأس ۱۳۷۳&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/مقالات-تحقیقاتی-و-پایان-نامه-شکل-۲-۱-ویژگی-های-چهار-خلط-مزاجی-صفراوی-دموی&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/مقالات-تحقیقاتی-و-پایان-نامه-شکل-۲-۱-ویژگی-های-چهار-خلط-مزاجی-صفراوی-دموی</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; مقالات تحقیقاتی و پایان نامه | ۲-۲-۶- نظریه­ های یادگیری خودتنظیم: – 8 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557099971&quot; data-words=&quot;1022&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲- راهبردهای نظارت و ارزشیابی: منظور از نظارت و ارزشیابی این است که یادگیرنده برای آگاهی یافتن از چگونگی پیشرفت خود برکار خود نظارت آگاهانه اعمال می­ کند و مرتباً به ارزشیابی می ­پردازد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_19_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://feko.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S-8-1.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;از جمله ‌می‌توان نظارت بر توجه در هنگام خواندن یک متن، از خود سوال پرسیدن به هنگام مطالعه و بررسی زمان و سرعت مطالعه نام برد. (سیف، ۱۳۸۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۳- راهبردهای نظم­دهی: راهبردهای نظم­دهی یا سامان دهی موجب انعطاف­پذیری در رفتار یادگیرنده می­ شود و به او کمک ‌می‌کنند تا هر زمان که برایش ضرورت داشته باشد روش کسب یادگیری خود را تغییر دهد. (دمبو ۱۹۹۴) در این باره گفته است «یکی از ویژگی­هایی یادگیرندگان موفق توانایی اصلاح کردن، راهبردهای شناختی غیرموثر خود یا تعویض آن ها با راهبردهای شناختی مؤثر است»&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;راهبردهای نظم­دهی با راهبردهای نظارت و ارزشیابی به طور هماهنگ عمل می­ کند. پینتریج (پینتریج، نقل در صمدی، ۱۳۸۶) معتقد است که راهبردهای نظم­دهی راهبردهای هستند که به ارزیابی تولیدات و جریان­های نظم­دهی و یادگیری فرد مربوط می­ شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;وقتی یادگیرنده، از راه نظارت و ارزشیابی متوجه می­ شود که در یادگیری موفقیت لازم را به دست نمی­آورند و این مشکل را ناشی از سرعت کم یا زیاد مطالعه یا راهبرد غیر مؤثر یادگیری می­داند بلافاصله سرعت خود را تعدیل می­ کند یا راهبرد موثرتری را برمی­گزیند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر اساس نظریه زیمرمن و پونز (۱۹۸۸) راهبردهای یادگیری خودتنظیمی متشکل از چهار زیرمجموعه است&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;الف) خودتنظیمی رفتاری&lt;sup&gt;[۹۳]&lt;/sup&gt;، ب) خودتنظیمی انگیزشی&lt;sup&gt;[۹۴]&lt;/sup&gt;، ج) خودتنظیمی شناختی&lt;sup&gt;[۹۵]&lt;/sup&gt;، د) خودتنظیمی فراشناختی&lt;sup&gt;[۹۶]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;الف) خودتنظیمی رفتاری: به استفاده بهینه از منابع گوناگون اطلاق می­ شود، که یادگیری را افزایش می­دهد. این منابع زمان، مکان، چگونگی کمک گرفتن از منابع در دسترس از جمله معلم، والدین، دوستان، مواد آموزشی و کمک­آموزشی را شامل می­ شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ب) خودتنظیمی انگیزشی: به کاربرد فعال، راهبردهای انگیزشی به منظور افزایش یادگیری گفته می­ شود.فراگیران با خود تنظیمی انگیزشی در تمام مراحل یادگیری خود را فردی خودکارآمد و مستقل می­دانند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ج) خودتنظیمی شناختی: از نظر شناختی نیز فراگیران خود تنظیم افرادی هستند که خزانه غنی از راهبردهای شناختی دارند و می ­توانند آن­ها را با آمادگی و مهارت­ برای انجام تکالیف مختلف تحصیلی به کار برند. برای مثال، این دانش ­آموزان در راهبردهای شناختی از قبیل مرور کردن و سازماندهی کردن ماهر هستند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;د) خودتنظیمی فراشناختی: فراگیران خودتنظیم افرادی هستند که در فرایند یادگیری از برنامه­ ریزی، کنترل و نظارت و نظم­دهی استفاده ‌می‌کنند (زیمرمن و پونز، ۱۹۸۸)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرایندهای فراشناختی دارای دو جنبه­ مستقل اما مرتبط با یکدیگرند. یکی دانش فراشناختی و دیگری تجربه فراشناختی(کدیور، ۱۳۸۳).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فلاول (۱۹۷۹) درباره دانش فراشناختی به سه مؤلفه‌ زیر اشاره ‌کرده‌است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;الف) اطلاع فرد از نظام شناختی خود: این مؤلفه‌ به دانش فرد ‌در مورد آنچه باید درباره یادگیری و پردازش اطلاعات بداند، اشاره دارد و شامل اطلاعاتی مثل توانایی‌های حافظه، مراحل حافظه، انواع حافظه و ظرفیت آن ها، نحوه­ بررسی مطالب و فرایندهای کنترل کننده است (سواسون، ۱۹۹۰، امینی، ۱۳۸۵).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ب) اطلاع فرد از تکلیف: اطلاع فرد از تکلیف: اطلاع فرد از تکلیف شامل، دانش درباره ماهیت و کیفیت تکلیفی که قرار است فرد با آن درگیر شود. از آنجا که عدم کارایی حافظه بیشتر از دو چیز به فقدان توجه در شروع کار برمی­گردد اگر مطالب در ابتدای پردازش با دقت انتخاب نشده باشد. یادآوری آن نیز با اختلال مواجه خواهد شد. به منظور پردازش صحیح اطلاعات یادگیرنده، باید بتوانند از توانایی‌های خود در آن زمینه آگاهی پیدا کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ج) اطلاع فرد از راهبردها: این مؤلفه‌­ به آگاهی از راهبردهای شناختی و فراشناختی و اینکه فرد بداند چه وقت و کجا؟ از چه راهبردهایی می ­تواند استفاده کند اشاره دارد. اطلاع از راهبردهایی که در مراحل گوناگون نگهداری و بازیابی اطلاعات به کار می­رود.(سازمان­دهی، مرور ذهنی، تمرکز و…) می ­تواند در امر اکتساب و یادآوری مؤثر باشد. (همان منبع).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h1&gt;۲-۲-۶- نظریه­ های یادگیری خودتنظیم:&lt;/h1&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دیدگاه­ های نظری در زمینه یادگیری خودتنظیمی فراوانند. این نظریه ­ها اکثراً از ۱۹۸۰ در تلاش برای توصیف آن چه یادگیرنده موفق انجام می­دهد، پدید آمده­اند. اکثر این نظریه ­ها چند فرض مشترک درباره یادگیری دارند. اول این که یادگیرندگان در فرایند یادگیری خود فعالانه شرکت ‌می‌کنند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دوم این که یادگیرندگان راهبردهای شناختی، فراشناختی و انگیزشی را کنترل و تنظیم می­ کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سوم این که یادگیرندگان معیارهای دارند که می ­توانند عمل خود را برای تعیین این که فرایندهای خاص باید ادامه داشته باشد یا این که باید در آن­ها تغییراتی ایجاد شود ارزیابی ‌می‌کنند (پرکان ،۱۳۸۷).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در دهه­ ۱۹۸۰ سازه خودتنظیمی در زمینه یادگیری مطرح شد و مورد توجه مکاتب گوناگون روان­شناسی از جمله رفتارگرایی، شناخت گرایی و ساختار گرایی قرار گرفت. همه این نظریه ­ها هسته­ی اصلی سازه خود تنظیمی را راهبردهای شناختی و فراشناختی معرفی کرده ­اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h1&gt;۲-۲-۶-۱- نظریه کنشگر&lt;/h1&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به دنبال اصول محیط گرایی اسکینر و سازگار کردن دانش رفتاری و برای استفاده شخصی محقق کنشگر، بزرگ­ترین و موثرترین مجموعه ­های محقق درباره خودتنظیمی را به وجود آورده­اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نظریه­پردازان کنشگر بیان ‌می‌کنند که پاسخ­های خودتنظیمی بایستی به محرک تقویت کننده بیرونی منتقل شود چرا که پاسخ­های خودتنظیمی در واقع حلقه­ هایی هستند که برای به دست آوردن تقویت کننده بیرونی به یکدیگر متصل می­شوند. ‌بنابرین‏ اگر خود تقویتی به شکل زنگ تفریح به دانش ­آموزان در کسب موفقیت­شان در آزمون کمک کند زنگ تفریح ادامه می­یابد و اگر سبب بهبود عملکرد در آزمون نشود این خود تقویتی متوقف خواهد شد. بر طبق عقیده نظریه پردازان کنشگر، تصمیم برای خودتنظیمی بستگی به اندازه پاداش­های فوری و تعویق و فاصله زمانی بین آن­ها دارد و بر اهیمت خودنظارتی یا ثبت شخصی در خودتنظیم شدن یادگیرنده تأکید می­ کند. (زیمرمن، ۲۰۰۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;رفتار خودتنظیم، مستلزم انتخاب از بین اعمال مختلفی است که فرد می ­تواند داشته باشد. از این دیدگاه فرد خود تنظیم تصمیم ‌می‌گیرد که کدام رفتار را تنظیم کند، از محرک­های افتراقی برای انجام آن­ها استفاده کند، به ارزیابی عملکرد خود با توجه به معیارهای تعیین شده بپردازد و تقویت­ها را به کار گیرد. از دیدگاه کنشگر، خودتنظیمی شامل سه فرایند فرعی عمده: نظارت بر خود ،آموزش خود و تقویت خود نیز است. کدیور؛ ۱۳۸۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;روش­های آموزش کلیدی که آن­ها در آموزش­شان به کار می­ گیرند عبارتند از: الگودهی، آموزش کلامی و تقویت. بر طبق عقیده نظریه­پردازان کنشگر، عوامل کلیدی سوق دادن به یادگیری خودتنظیمی حضور مؤثر الگوها و وابستگی­های بیرونی برای پاسخ­های خودتنظیمی است. (زیمرمن، ۲۰۰۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h1&gt;۲-۲-۶-۲- نظریه پدیدار شناختی&lt;/h1&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/مقالات-تحقیقاتی-و-پایان-نامه-۲-۲-۶-نظریهs-های-یادگیری-خودتنظیم-nn8&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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							</item>
				<item>
			<title>&#34; دانلود پایان نامه و مقاله | قسمت 12 – 5 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557176431&quot; data-words=&quot;1010&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بنا به دیدگاه گیلبرت کسانی که برای پرهیز از صدمه از جانب افراد صاحب پایگاه های بالاتر و مسلط تر اجتماعی، به جایگاه اجتماعی پایین تر بسنده می‌کنند، اضطراب اجتماعی را در حکم یک پاسخ مفید در برابرآسیب ( برای مثال، مرگ یا صدمه) شکل می‌دهند . این مدل ابراز می‌دارد که افراد مضطرب اجتماعی ممکن است از ارتقاء جایگاه خود بترسند زیرا این ارتقاء می‌تواند منجر به تعارض با افراد قدرتمندتر شود. با توجه نه نقش شناخت ها در درمان شناختی- رفتاری اضطراب اجتماعی لازم است مدل های شناختی، شناخت های اختصاصی این اختلال را مشخص سازند ( گیلبرت، ۲۰۰۱ ، به نقل از داودی و همکاران، ۱۳۹۱ ).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_24_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://shivadanesh.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-9.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;نظریه شناختی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یکی از فرضیه های اساسی رویکرد های شناختی در زمینه اضطراب آن است که اضطراب با پیش‌بینی رخداد یک رویداد منفی یا زیان بار و یا ادراک تهدید ( بک و همکاران، ۱۹۸۵ ) فراخوانده می شود. ادراک افراد از تهدید به وسیله قضاوت های ذهنی شان از پیش‌بینی رخداد یک رویداد منفی و پیامد&lt;sup&gt;[۱۲۲]&lt;/sup&gt; یا تنفر&lt;sup&gt;[۱۲۳]&lt;/sup&gt; از آن رویداد تبین می شود ( کار&lt;sup&gt;[۱۲۴]&lt;/sup&gt;، ۱۹۷۴ ) .&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‌بنابرین‏ افراد با اختلال های اضطرابی پیامدهای رویدادهای منفی را بالاتر از افراد بهنجار برآورد می‌کنند (بوتلرو متیوس&lt;sup&gt;[۱۲۵]&lt;/sup&gt; ، ۱۹۸۳؛ فوا، فرانکلین، پری و هربرت&lt;sup&gt;[۱۲۶]&lt;/sup&gt; ، ۱۹۹۶).اگرچه احتمال دارد که این داوری های اغراق آمیز با بیشتر اختلال های عاطفی همراه باشد، نظریه پردازان بر این باورند که داوری ها، ذهنی و در هر اختلال اضطرابی ویژه است . ‌بنابرین‏ برآورد افراطی پیامد منفی رویدادهای اجتماعی ، ویژه اختلال اضطراب اجتماعی است ( بک و همکاران، ۱۹۸۵؛ فوا و کوزاک، ۱۹۸۵؛ فوا و کوزاک، ۱۹۸۶ ). درمان های شناختی– رفتاری برای اختلال اضطراب اجتماعی مبتنی بر الگوهای گوناگون شناختی در سبب شناسی این اختلال هستند و دو روش مواجهه و بازسازی شناختی بیش از سایر روش ها از سوی کارشناسان مورد تأکید قرار گرفته اند ( لیهی و هالند&lt;sup&gt;[۱۲۷]&lt;/sup&gt;، ۲۰۰۰؛ تورک و همکاران، ۲۰۰۱؛ کروزییر و آلدن&lt;sup&gt;[۱۲۸]&lt;/sup&gt;، ۲۰۰۵؛ رووا و آنتونی، ۲۰۰۵ ).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دو روش درمانی یعنی مواجهه و بازسازی شناختی هر کدام به تنهایی نیز در درمان اختلال اضطراب اجتماعی به کار می‌روند، اما از آنجا که ترس از ارزیابی منفی و سوگیری تعبیر از اجزای شناختی مهم در این اختلال به شمار می‌روند، از سوی دیگر چون بازسازی شناختی یکی از اثرات مهم درمان شناختی– رفتاری استاندارد است ( تیلور&lt;sup&gt;[۱۲۹]&lt;/sup&gt;، ۱۹۹۶؛ تورک و همکاران،۲۰۰۱) پیش‌بینی می شود که درمان شناختی-رفتاری در مقایسه با مواجه درمانی، کاهش بیشتر این دو بخش شناختی را در این اختلال در پی داشته باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;درمان شناختی- رفتاری گروهی در واقع شکل گروهی درمان شناختی- رفتاری انفرادی است که در یک گروه هشت نفره از مبتلایان به اختلال اضطراب اجتماعی به طور هفتگی و به مدت دو ساعت اجرا می شود. در درمان شناختی-رفتاری گروهی برای اختلال اضطراب اجتماعی، درمانگر روش های بازسازی شناختی&lt;sup&gt;[۱۳۰]&lt;/sup&gt; و مواجهه را در هم ادغام می‌کند ( تورک و همکاران، ۲۰۰۱؛ هیمبرگ، ۲۰۰۲ ، به نقل از داداش زاده و همکاران، ۱۳۹۱ ).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲-۴- سبک های هویتی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شکل گیری هویت، زمینه را برای برخی چالش های اساسی در سال های جوانی مهیا می‌سازد. از جمله ایجاد صمیمیت یا ظرفیتی برای باز بودن دوطرفه و مشارکت در روابط با دیگران.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یکی از نظریه پردازان اولیه و بزرگ در زمینه ی هویت، اریکسون می‌باشد. اریکسون (۱۹۸۲، به نقل از مونتگومری،۲۰۰۵)، این استدلال را مطرح ‌کرده‌است که کسب صمیمیت و هویت بالیده روانی- اجتماعی فرایند های مرتبط باهم ولی مستقل می‌باشند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;برزونسکی و کوک&lt;sup&gt;[۱۳۱]&lt;/sup&gt;(۲۰۰۲)، مفهوم پیچیده ی بحران هویت که برگرفته از مفاهیم نظریه پردازانی چون اریکسون است را در مفهوم ساده تر دیدگاه شناختی، یعنی مهارت های مقابله ای با تأکید بر مهارت حل مسئله تبیین کرده‌اند. بر اساس این الگو، برزونسکی به سه سبک هویت متمایز اشاره نموده است. این سبک ها ناشی از استراتژی های حل مسئله یا ساز و کارهای مقابله ای است. برزونسکی بر این باور است که افراد توانایی انتخاب یکی از این سه سبک را دارند: سبک اطلاعاتی&lt;sup&gt;[۱۳۲]&lt;/sup&gt;، سبک هنجاری&lt;sup&gt;[۱۳۳]&lt;/sup&gt;، و اجتنابی- سردرگمی&lt;sup&gt;[۱۳۴]&lt;/sup&gt;.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سبک هویت اطلاعاتی، ظاهراً سازگارانه ترین سبک برای اداره ی موقعیت های روزانه می‌باشد. افراد دارای سبک هویتی اطلاعاتی مجدانه در حال جستجو، پردازش و ارزیابی اطلاعات مربوط به خود هستند. این سبب به طور مستقیم با انعکاس خود، تمرکز بر مسئله، سبک معرفت شناسی خود گرایانه، علاقه ی زیاد به شناخت چیزهای جدید ‌در مورد خود، تصمیم گیری بر اساس نقشه، هشیاری و پذیرا بودن برای تجربه ارتباط دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;افراد دارای سبک هویت هنجاری، به شکل کاملا خودکار، معیارها و انتظارات افراد مهم را درون سازی می‌کنند و خود را با آن تطبیق می‌دهند(هیگنز، نقل از برزونسکی،۲۰۰۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سبک هنجاری شامل یک دیدگاه بسته ی ذهنی، خودپنداره ی ثابت و سرکوب کننده ی اکتشاف است. هدف اولیه ی آن، دفاع و حفظ دیدگاه شخصی موجود انسان است. این افراد بسیار دفاعی هستند و علاوه بر این، تحمل پایین نسبت به ابهام و نیاز زیادی به ساختار دارند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سبک هویتی سردرگم- اجتنابی، با تعلل ورزی و تلاش جهت طفره رفتن از تعارضات هویتی و موقعیت های تصمیم گیری تا حدی که امکان داشته باشد، همراه است(برزونسکی،۲۰۰۴). این نوع سبک هویتی با سطح پایین خودآگاهی، هشیاری و ماندگاری شناختی و با سطح بالای راهبرد های تصمیم گیری و شناختی ناکارآمد رابطه ی مستقیم دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سبک سردرگم- اجتنابی با انطباق یابی هیجان مدار(دوریز و همکاران،۲۰۰۴)، و راهبرد های تصمیم گیری ناسازگارانه مثل تعلل ورزی پیش از تصمیم گیری، عقلی سازی پس از تصمیم گیری و معذرت خواهی همراه است (نقل از برزونسکی،۲۰۰۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲-۵- مفهوم شناسی هویت&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;واژه هویت یا Identity ریشه در زبان لاتین دارد و از Identitas که از Idem یعنی «مشابه و یکسان» ریشه می‌گیرد. این واژه در یک معنا به ویژگی یکتایی و فردیت، یعنی تفاوت های اساسی که یک شخص را از همه کسان دیگر به واسطه هویت «خودش» متمایز می‌کند، اشاره دارد و در معنای دیگر به ویژگی همسانی که در آن اشخاص می‌توانند به هم پیوسته باشند و یا از طریق گروه یا مقولات ‌بر اساس صور مشترک برجسته ای، نظیر ویژگی های قومی و … به دیگران بپیوندند، دلالت دارد (بایرون، ۱۹۹۷، به نقل از فکوهی، ۱۳۸۰).&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-12-nn5&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-12-nn5</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; تحقیق-پروژه و پایان نامه | ۲-۳-۲٫ مطالعات انجام شده در خارج ایران: – 8 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557093414&quot; data-words=&quot;1025&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;ولی پور و عراقی (۲۰۱۴) در پژوهشی با عنوان راهبردهای یادگیری مبتنی بر مغز و تأثیر آن بر یادگیری دانشجویان زبان انگلیسی، به بررسی اثر استفاده از راهبردهای یادگیری مبتنی بر مغز بر درک مطلب خواندن دانشجویان دانشگاهی پرداختند. در این مطالعه تعداد ۲۰ دانشجو را از دانشگاه آزاد اسلامی تنکابن انتخاب و در دو گروه ۱۰ نفری آزمایش و کنترل قرار دادند. در گروه آزمایش مدرسان به پیاده سازی یادگیری مبتنی بر مغز پرداخته و در گروه کنترل، آموزش ها به روش مرسوم ارائه گردید. نتایج این مطالعه نشان داد که گروه آزمایش دارای عملکرد بهتری نسبت به گروه کنترل بود.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_23_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۲-۳-۲٫ مطالعات انجام شده در خارج ایران:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;ازدن&lt;sup&gt;[۳۲]&lt;/sup&gt; (۲۰۰۸) در مطالعه ای به بررسی تأثیر یادگیری مبتنی بر مغز بر پیشرفت تحصیلی و یادداری مفاهیم درس علوم پرداخت. او در این مطالعه که به شکل مداخله ای صورت گرفت ۲۲ دانش آموز پایه پنجم را به مدت ۱۱ روز و در مدت زمان ۱۸ ساعت تحت متغیرهای آموزشی قرار داد. نتایج بیانگر آن بود که تفاوت بین دو گروه آزمایش و کنترل در متغیرهای مورد مطالعه به نفع گروه آزمایش معنادار بود.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;دومان&lt;sup&gt;[۳۳]&lt;/sup&gt;(۲۰۱۰) در مطالعه ای به بررسی تأثیر یادگیری مبتنی بر مغز بر پیشرفت تحصیلی دانش آموزان با سبک های مختلف یادگیری پرداخته است. او در این مطالعه، ۶۸ دانش آموز رشته علوم اجتماعی را در یک طرح آزمایشی مورد مطالعه قرار داد. نتایج این مطالعه نشان داد که به کارگیری یادگیری مبتنی بر مغز از تأثیرگذاری بیشتری بر پیشرفت تحصیلی فراگیران در گروه آزمایش نسبت به گروه کنترل برخوردار بوده است. اما بین میزان موفقیت تحصیلی دانش آموزان گروه آزمایش با سبک های مختلف یادگیری، تفاوت معنادار آماری یافت نگردید.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;ریاست&lt;sup&gt;[۳۴]&lt;/sup&gt; و همکاران (۲۰۱۰) در مطالعه ای به بررسی تأثیر یادگیری مبتنی بر مغز بر پیشرفت درسی دانش آموزان دبیرستانی پرداخته‌اند. آن ها در این مطالعه ۵۰ دانش آموزان سال اول دبیرستانی را در دو گروه مساوی مورد مطالعه قرار دادند. در یک گروه آموزش به شیوه ی یادگیری مبتنی بر مغز و در گروه دیگر آموزش به شیوه ی مرسوم ارائه گردید. نتایج این مطالعه بیانگر اثرگذاری بیشتر یادگیری مبتنی بر مغز نسبت به روش مرسوم بر ارتقائ سطح پیشرفت تحصیلی فراگیران بود.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;اینوایزیبل&lt;sup&gt;[۳۵]&lt;/sup&gt; (۲۰۱۲) در بررسی اثربخشی یادگیری مبتنی بر مغز بر موفقیت تحصیلی و یادداری دانش آموزان در درس مطالعات اجتماعی، در یک طرح تجربی با پیش آزمون – پس آزمون و گروه کنترل و با جمع‌ آوری داده های لازم در دو شکل کمی و کیفی، نتیجه گرفت که یادگیری مبتنی بر مغز ضمن اینکه سبب بالا رفتن سطح نمرات دانش آموزان و یادداری آنان گردیده، فراگیران نیز دیدگاه مثبتی نسبت به آن پیدا کرده‌اند و آن را تجربه ی یادگیری و به یادماندنی بدون حفظ کردن مطالب دانسته اند.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول شماره (۲-۱): خلاصه نتایج پژوهش های پیشین در رابطه با موضوع محقق و همکاران سال نتیجه تلخابی ۱۳۸۷ در این شیوه ی آموزشی، اهداف برنامه ی درسی باید با زندگی واقعی دانش آموزان مرتبط گردد. در این برنامه درگیر ساختن تمام قسمت های مغز از اهمیت ویژه ای برخوردار است، ضمن آنکه بر نقش هنر و موسیقی تأکید می شود. ارزشیابی به فرایند یادگیری معطوف است و خودارزیابی دانش آموزان را ارج می نهد. تلخابی ۱۳۸۷ در این شیوه ی آموزشی، اهداف برنامه ی درسی باید با زندگی واقعی دانش آموزان مرتبط گردد. در این برنامه درگیر ساختن تمام قسمت های مغز از اهمیت ویژه ای برخوردار است، ضمن آنکه بر نقش هنر و موسیقی تأکید می شود. ارزشیابی به فرایند یادگیری معطوف است و خودارزیابی دانش آموزان را ارج می نهد. سیفی و همکاران ۱۳۸۶ آموزش یادگیری مغزمحور بر میزان درک مطلب و سرعت یادگیری دانش آموزان افزوده و بر افزایش کیفیت یادگیری آن ها تأثیر قابل توجهی گذاشته است. ولی پور و عراقی ۲۰۱۴ یادگیری مبتنی بر مغز بر یادگیری دانشجویان زبان انگلیسی مؤثرتر از روش مرسوم است. ازدن ۲۰۰۸ به کارگیری یادگیری مبتنی بر مغز از تأثیرگذاری بیشتری بر پیشرفت تحصیلی فراگیران در گروه آزمایش نسبت به گروه کنترل برخوردار بوده است. اما بین میزان موفقیت تحصیلی دانش آموزان گروه آزمایش با سبک های مختلف یادگیری، تفاوت معنادار آماری یافت نگردید. ریاست و همکاران ۲۰۱۰ یادگیری مبتنی بر مغز بر پیشرفت درسی دانش آموزان دبیرستانی مؤثرتر از روش مرسوم است. اینوایزیبل ۲۰۱۲ یادگیری مبتنی بر مغز ضمن اینکه سبب بالا رفتن سطح نمرات دانش آموزان و یادداری آنان گردیده، فراگیران نیز دیدگاه مثبتی نسبت به آن پیدا کرده‌اند و آن را تجربه ی یادگیری و به یادماندنی بدون حفظ کردن مطالب دانسته اند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فصل سوم:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;روش شناسی پژوهش&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۳-۱٫ مقدمه:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در این فصل ابتدا روشی که در این پژوهش به کار گرفته شده است توضیح داده می­ شود. در ادامه جامعه آماری پژوهش، حجم نمونه و روش نمونه گیری به کار رفته در پژوهش برای انتخاب نمونه های آماری معرفی می‌گردد و سپس روش و ابزار جمع ­آوری اطلاعات و نیز نحوه تعیین میزان پایایی و روایی آن ها و همچنین متغیرهای مورد مطالعه در پژوهش در سه بخش متغرهای مستقل، وابسته و کنترل بیان گردد و در پایان نیز روش تجزیه و تحلیل اطلاعات در دو بخش آمار توصیفی و استنباطی اشاره می شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://feko.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-9.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۳-۲٫ نوع و روش تحقیق:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;این مطالعه از نظر هدف در گروه مطالعات کاربردی و از نظر شیوه و روش اجرا از جمله ی مطالعات شبه آزمایشی با پیش آزمون و پس آزمون و گروه کنترل است. مکان جغرافیایی اجرای مطالعه، مدارس راهنمایی آموزش و پرورش شهرستان اسلام آباد در سال تحصیلی ۹۴-۹۳ و مواد و تجهیزات لازم برای اجرای مطالعه شامل مواد و وسایلی است که در تمام مدارس راهنمایی در دسترس می‌باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول ۳-۱: طرح مورد استفاده در پژوهش گروه پیش آزمون متغیر مستقل پس آزمون اول پس آزمون دوم آزمایش T&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt; X T&lt;sub&gt;2&lt;/sub&gt; T&lt;sub&gt;3&lt;/sub&gt; کنترل T&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt; – T&lt;sub&gt;2&lt;/sub&gt; T&lt;sub&gt;3&lt;/sub&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۳-۳٫ متغیرهای تحقیق:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;متغیرهای این مطالعه را مانند سایر متغیرهای مورد مطالعه در مطالعات شبه آزمایشی در سه گروه عمده می توان تقسیم بندی نمود:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;متغیرهای مستقل:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;متغیرهای مستقل این مطالعه شامل نوع و روش آموزش است که دارای دو سطح است و به دو شیوه اجرا می‌گردد. در شیوه ی اول آموزش مبتنی بر مغز و و شیوه ی دوم، آموزش به شیوه ی روال مرسوم و متداول مدارس می‌باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;متغیرهای وابسته:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;با توجه به عنوان مطالعه و نیز اهداف جزئی در نظر گرفته شده برای مطالعه ی حاضر، متغیرهای&lt;br /&gt;وابسته­ی مورد مطالعه در این پژوهش شامل:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;میزان یادگیری مفاهیم درسی درس علوم در دانش آموزان مورد مطالعه&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-۲-۳-۲-مطالعات-انجام-شده-در-خارج-ایران-nn8&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-۲-۳-۲-مطالعات-انجام-شده-در-خارج-ایران-nn8</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; فایل های مقالات و پروژه ها – قسمت 41 – 3 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557166185&quot; data-words=&quot;787&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;(ب) منحصراً به کشورهای در حال توسعه دیگر قبل از لازم الاجرا شدن این موافقت نامه اعطا شده است…&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_9_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;(د) به هر کشور شرکت کننده دیگری و یا کشورهای در حال توسعه عضو کمیسیون اقتصادی و اجتماعی آسیا و اقیانوسیه (ESCAP) که با کشور شرکت کننده مبادرت به تشکیل یک گروه واحد اقتصادی (اتحادیه اقتصادی) می‌کنند اعطا شده است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;(هـ) به هر کشور شرکت کننده دیگر و یا دیگر کشورهای در حال توسعه ای که با دولت شرکت کننده یک موافقت نامه همکاری صنعتی منعقد می‌کنند یا در بخش های دیگر تولیدی در چارچوب ماده ۱۲ یک شرکت مختلط را تشکیل می‌دهند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ماده ۱۲: کشورهای شرکت کننده موافقت می‌کنند تا ترجیحات تعرفه ای و غیر تعرفه ای خاص را که به نفع محصولات مندرج در موافقت نامه های همکاری صنعتی و شرکت های مختلط در بخش های دیگر تولید می‌باشد و یا با مشارکت دیگر کشورهای در حال توسعه که اعضا گروه مذاکرات تجاری ESCAP هستند و منحصراً به نفع کشورهای شرکت کننده در موافقت نامه های گفته شده یا شرکت های مختلط اعمال می‌شوند را بررسی نمایند. ↑&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۱-” official records of the general assembly , thirty – second session ” , supplement no. 11, (A/32/11) , para (44-43). ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۲-YILC , 1978, vol .II, part two , p.68. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۳-Article II:I of the GATS ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;جوامع اروپایی اشاره داشتند به اینکه برخلاف ماده (۲)۱ ، ماده ۱۷ گاتس راجع به تهدید به رفتار ملی صراحتا بیان ‌کرده‌است که این تعهد هم به تبعیض قانونی و هم به تبعیض دو فاکتو قابل اعمال است.Vanden bossche , peter , op. cit , pp.(368-9). ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;هرچند نهاد استیناف با این ایده که گاتس تبعیضات دو فاکتو را هم شامل می شود موافق بود اما استدلال پانل را کاملا قانع کننده نیافت زیرا پانل ماده ۲ گاتس را در پرتو گزارش های تفصیلی پانل از تعهد به رفتار ملی مندرج در ماده ۳ گات تفسیر نموده بود. نهاد استیناف ‌به این نتیجه رسید که ماده ۲ گاتس مربوط به رفتار ملت کامله الوداد است و نه رفتار ملی . لذا مقرراتی که مربوط به تعهدات رفتار ملی در گاتس و رویه پیشین گات راجع به تعهد به رفتار ملی مندرج در ماده ۳ گات ۱۹۹۴ می شود لزوماً ارتباطی با تفسیر ماده ۲ گاتس ندارد . مطابق با نظر نهاد استیناف پانل می‌توانست مبنای استدلالی محکم تری برای مقایسه تعهد ملت کامله الوداد در ماده ۲ گاتس با تعهدات ملت کامله الوداد در گات ۱۹۹۴ داشته باشد.نهاد استیناف به ویژه به گزارش در قضیه جامعه اقتصادی اروپا – واردات گوشت اشاره می‌کند.&lt;br /&gt;&lt;a href=&quot;https://elmifar.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-13.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;Appellate body, ec- bananas III , op .cit , para .(231-233). ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۲-Vanden bossche , peter , op. cit , p.319. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۱-Article 1:3 (a) of the GATS ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۲-Article XXVIII(a) of the GATS ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;مطابق ماده یک گاتس کلیه اعضا متعهدند که تمامی اقدامات متعارف را به منظور تضمین این امر که تمامی سطوح حکومتی و نهادهای غیر حکومتی که دارای اختیارات اعمال حاکمیت هستند تعهدات مندرج در گاتس را به انجام می رسانند به کار بندند. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;مرجع استیناف نهایتاً نتیجه گیری پانل مبنی بر اینکه معافیت از عوارض وارداتی با الزامات ماده ۲ گاتس منطبق نیست را رد کرد. اما این نقض نه به معنای تأیید عمل کانادا در جهت به تعهدش بوده است بلکه ‌به این دلیل بود که پانل نتوانست نتیجه گیری خود مبنی بر عدم انطباق معافیت از عوارض وارداتی با ماده (۲)۱ گاتس را اثبات نماید.Appellate body report, ” Canada- autos ” , op. cit , paras. (182 and 184). ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۵-Article 1: (3) &amp;#169; of the GATS ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;اقدامات بیشماری خدمات در بخش حمل و نقل هوایی را متاثر می‌سازند که داخل در چهارچوب اعمال گاتس نمی شوند.GATS annex on air transport services , para .2. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;مطابق ماده (د)۲۸ گاتس، حضور تجاری به معنای هر نوع استقرار حرفه یا تجارت که می‌تواند از طریق ایجاد ، تحصیل ، یا ابقا یک شخصیت حقوقی صورت گیرد یا از طریق ایجاد یا ابقا شعبه ای از شرکت مادر یا یک دفتر نمایندگی در سرزمین یک عضو به منظور ارائه خدمت انجام شود می‌باشد. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;برآورد می شود که در ارائه ی خدمات به روش cross border و روش حضور تجاری ” commercial presence ” هر نماینده ای می بایست حدود ۴۰% از کل تجارت خدمات در دنیا را حائز باشد در روش ” consumption abrod ” حدود ۲۰% را باید حائز باشد در روش ارائه خدمات از طریق اشخاص حقیقی این موضوع اهمیتی ندارد.Wto secretariat , market access: unfinished business, special studies 6 (wto , 2001) , p.1050. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۱-Governin ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۲-Regulating ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۳-Appellate body report , ” ec- bananas III ” , op . cit , para.220. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;۴-“ec- banana III ” , http:// www.trade law.net /reports/wto appellate bodies/ec- banana III (panel).pdf, para .7.285 , visited on 14.2.2009. ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-n-قسمت-41-nn3&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
			<link>https://rif.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-n-قسمت-41-nn3</link>
							</item>
				<item>
			<title>&#34; فایل های مقالات و پروژه ها – -آموزش مهارت های ارتباطی و حل مسئله(CPT): – 7 &#34;</title>
						<description>&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;
&lt;div id=&quot;story&quot; class=&quot;story&quot; data-id=&quot;1557020221&quot; data-words=&quot;1166&quot;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در زوج درمانی رفتاری سنتی برای غلبه برای این مشکلات از راهبردهای تغییر رفتار و مهارت آموزی استفاده می‌کنند. دو بخش اصلی راهبردهای تغییر عبارتند از تبادل رفتاری (BE) و آموزش ارتباط و حل مسئله (CPT) &lt;sup&gt;[۶۴]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_8_50.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://shivadanesh.ir/&quot;&gt; &lt;img src=&quot;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/%D9%82%D8%AB%D8%AB.png&quot; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;BE به دنبال افزایش نسبت رفتارهای مثبت به رفتارهای منفی زوجین است و هدف از آن کاهش سریع ناراحتی زوج است. در مقابلCPT به زوج­ها مهارت های لازم برای مواجهه با مشکلات آینده آموزش داده می شود و هدف از آن ایجاد تغییرات با دوام در رابطه زوجین از طریق اصلاح الگوهای بنیادی رفتارشان است(جیکوبسن و مارگولین، ۱۹۷۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مداخلات زوج درمانی رفتاری سنتیTBCT) )&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱-مبادله رفتاری(BE):&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;TBCTاغلب با مرحله BE شروع می شود، زیرا در این زمان روابط زوج­ها از حالت لذت بخش و پاداش دهنده خارج شده است و در عوض همدیگر آزاردهنده و غیر قابل تحمل می بینند. پس BE کمک می‌کند که رفتارهای خوشایند فورا افزایش یابد و احساس رضایت بیشتری در رابط احساس کنند(جیکوبسون و مارگولین ، ۱۹۷۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرصت های متفاوتی برای اجرای BE وجود دارد (جیکوبسون و مارگولین ،۱۹۷۹) اما همگی عنصرهای مشابه اصلی دارند. توصیف زیر فرمت خاصی BEاست که در پروتکل های تحقیقاتی استفاده می شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در پایان جلسه فیدبک به زوجین این تکلیف خانگی داده می شود که هر دو لیستی از رفتارهایی که تصور می‌کنند طرف مقابل را خشنود می‌کند یا برای او لذت بخش است را بنویسند البته به طور جداگانه و محرمانه. درجلسه بعد هر یک لیستش را بلند می‌خواند و زوج دریافت کننده میزانی که هر یک از آن ها لذت بخش است برایش را درجه بندی می‌کند. مهم این است که هر کس لیست را به تنهایی تهیه کرده باشد نه اینکه از طرف مقابل سوالات ساده ای مثل چه چیزی دوست داری برات انجام بدم ؟ را بپرسد. (جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;پس از خواندن لیست ها ، درمانگر باید بررسی کنند که آیا همه موارد آنهایی هستند که مورد علاقه طرف مقابل هستند یا خیر و موارد خنثی را حذف کند. به اضافه درمانگر می‌تواند از هر فرد بخواهد که موارد دیگری را به لیستی که طرف مقابل درست کرده اضافه کند. در آخر هر فرد برای هفته آینده چند آیتم را از لیستش باید اجرا کند. جنبه مهم BE این است که همسران نباید به اجرای رفتارهای خاصی متعهد شوند بلکه تنها یک یا بیشتر از رفتارهای لیست را انتخاب کنند و انجام دهند. در جلسات بعدی درمانگر ‌در مورد تجربه هر یک از طرفین در گرفتن و دادن لذت بخش ها پرس­وجو می­ کند(جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;BE به طور مستقیم فرسایش تقویت را هدف قرار می‌دهد و زوج ها آموزش می‌دهد که رفتارشان و اثر آن را به طرف دیگر به دقت بررسی کنند. بعلاوه وسیله­ای برای گرفتن فیدبک نیز می‌باشد. زیرا گاهی اوقات همسران ‌در مورد لذت بخش های دیگر تصورات اشتباه دارند. در نهایت BE چارچوبی برای یادگیری رفتارهای جدید را فراهم می آورد (جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲&lt;strong&gt;-آموزش مهارت های ارتباطی و حل مسئله(CPT):&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به دنبال BE مرحله آموزشی TBCT با آموزش مهارت های ارتباطی شروع می شود که شامل آموزش کلامی ، تمرین و مطالعه است (جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اما با وجود اینکه زوج ها مهارت ارتباط را آموخته­اند اما باز هم ممکن است که درحل مشکلات گیر کنند واحساس درماندگی کنند. لذا آموزش مهارت حل مسئله نیز اضافه می شود و به زوج تأکید می شود که از مهارت ارتباط در مواقع استفاده از روش حل مسئله استفاده کنند. باید به زوج تأکید کرد که بجای اینکه تقصیر را به گردن دیگری بیاندازند، سهم خود را در مشکل در نظر گرفته و برای حل آن روحیه همکاری را ایجاد کنند (جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;روابط به طور تدریجی تخریب می شود، لذت های اولیه عادی و خسته کننده می‌شوند. عیوب نا چیز به نقص های بزرگ تبدیل می شود . برای مقابله با این روند می بایست که به یکدیگر گابه­گاه لذت های جدیدی داد. روش تقویت متقابل بدین منظور مفید است(جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تقویت متقابل ‌به این معنی است که هر فرد کارهایی را انجام دهد که طرف مقابل دوست دارد – کارهایی کوچک و روشن­ مثل ماساژدادن ، شستن ظرف ها ، گل خریدن ، تعمیر یک لامپ، دسر مورد علاقه را درست کردن . اگر رابطه ای خسته کننده و ناخشنود کننده شده است. تقویت متقابل روشی مناسبی است(جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;این روش، روحیه همکاری را ارتقا می‌دهد، سریع اثر می‌کند ، حس اعتماد را با دادن حس کنترل با طرفین ایجاد می‌کند، مهارت آسانی است، می‌تواند نقطه شروع برای تغییرات مهم تر و بلند مدت تر باشد. روش تقویت متقابل در ۵ مرحله به طور هفتگی اجرا می شود.هفته اول: تهیه لیست لذت بخش ها، هفته دوم: فراهم کردن لذت بخش ها، هفته سوم: در خواست کردن برای لذت بخش ها ، هفته چهارم: تبادل قراردادها، هفته پنجم: لذت بخش های متقابل، هفته اول : تهیه لیست لذت بخش ها (جیکوبسن و کریستنسن، ۱۹۹۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;زوج درمانی رفتاری سنتی TBCT از راهبردهای تغییر رفتار و مهارت آموزی استفاده می‌کند. پژوهش‌های صورت گرفته هیچ کدام از مؤلفه‌های TBCT (مبادله رفتاری، آموزش مهارت‌های ارتباطی، و آموزش حل مسأله) را به عنوان جزء فعال این مجموعه‌ درمانی مجزا نکرده‌اند (چپمن و چامتون، ۲۰۰۳). اگرچه کوشش­هایی جهت افزودن مداخلات شناختی به TBCT صورت گرفته است (به ویژه توسط باکوم و اپستاین)، ولی مطالعات نشان داده است که افزودن مداخلات شناختی به مؤلفه‌ های این درمان اثربخشی درمان را افزایش نمی‌دهد. به علاوه مطالعات مختلف به طور هماهنگی نشان داده‌اند در جریان زوج درمانی، هیچ ارتباط معنی‌داری بین میزان تغییر در شناخت­ها با رضایت زناشویی یا فراوانی اختلافات زناشویی وجود ندارد ( هالفورد&lt;sup&gt;[۶۵]&lt;/sup&gt;، ساندرز و برنز&lt;sup&gt;[۶۶]&lt;/sup&gt;، ۱۹۹۳).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جیکوبسون از به وجود آورندگان TBCT بود و طرح درمانی که وی و مارگولین در سال ۱۹۷۵برای TBCT(BMT) منتشر کردند هنوز راهنمای اصلی این درمان می‌باشد (کریستنسن و همکاران، ۲۰۰۴؛ چپمن و کامتون، ۲۰۰۳؛ دیمیجیان و همکاران، ۲۰۰۲؛ جیکوبسون و همکاران، ۲۰۰۰). با وجود این و علی‌رغم حمایت تجربی قابل ملاحظه از TBCT، از اواسط دهه ۸۰ جیکوبسون به طور فزاینده‌ای به کارایی این درمان و به خصوص به «معنی‌داری بالینی» نتایج آن شک کرد (دیمیجیان و همکاران، ۲۰۰۲).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;درمانِ از لحاظ بالینی معنی‌دار از نظر جیکوبسون درمانی است که: الف) تغییر معنی‌دار بین ارزیابی قبل تا پس از درمان در زوج روی داده باشد، و ب) هیچ یک از زوجین در انتهای درمان دیگر به عنوان «دچار ناراحتی» طبقه‌بندی نشوند (چپمن و کامتون، ۲۰۰۳؛ جیکوبسون و همکاران، ۲۰۰۰). جیکوبسون و همکارانش (۱۹۸۴، به نقل از کریستنسن و همکاران، ۲۰۰۴، چپمن و کامتون، ۲۰۰۳، و دیمیجیان و همکاران، ۲۰۰۲ داده های مطالعات صورت گرفته ‌در مورد اثربخشی TBCT را مورد تحلیل دوباره قرار دادند که نشان داد اگرچه بیش از نیمی از زوجها پس از دوره‌ درمان بهتر شده‌اند (تغییر آماری معنی‌دار، ولی فقط اندکی بیش از یک سوم آن ها وارد «گستره‌ی کارکردی بدون ناراحتی» شده‌اند (تغییر بالینی معنی‌دار). به علاوه جیکوبسون و همکاران (۱۹۸۷، به نقل از دیمیجیان و همکاران، ۲۰۰۲، و چپمن و کامتون، ۲۰۰۳) متوجه شدند نزدیک به یک سوم زوجهایی که طی TBCT بهتر می‌شوند، ظرف دو سال پس از خاتمه درمان مقداری عود ناراحتی را تجربه می‌کنند.&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;p&gt;&amp;#8220;&lt;/p&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://rif.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-n-آموزش-مهارت-های-ارتباطی-و-حل-مسئله-cpt&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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